भुजंगासन

भुजंगासन, जिसे कोबरा पोज़ के नाम से भी जाना जाता है, एक लोकप्रिय योग आसन है जो विभिन्न शारीरिक और मानसिक लाभ प्रदान करता है।

भुजंगासन (कोबरा पोज़) करने के चरण:

  • प्रारंभिक स्थिति: फर्श की ओर मुंह करके पेट के बल लेट जाएं। अपने पैरों को एक साथ रखें और पंजों को पीछे की ओर रखें। अपनी हथेलियों को अपने कंधों के पास फर्श पर रखें, अपनी कोहनियों को अपने शरीर के करीब रखें।
  • श्वास लें: अपनी हथेलियों को फर्श पर मजबूती से दबाएं, और अपने श्रोणि और निचले शरीर को फर्श पर रखते हुए धीरे-धीरे अपने सिर, छाती और पेट को जमीन से ऊपर उठाएं। सुनिश्चित करें कि आपके कंधे आपके कानों से दूर हों।
  • खिंचाव: अपनी बाहों को जितना संभव हो उतना सीधा करें और अपनी पीठ को धीरे से झुकाएं। सुनिश्चित करें कि आप उठाने के लिए अपनी पीठ की मांसपेशियों का उपयोग करें, न कि केवल अपनी भुजाओं का।
  • टकटकी: आरामदायक टकटकी बनाए रखने के लिए सीधे आगे देखें या अपने सिर को थोड़ा पीछे की ओर झुकाएँ।
  • रुकें: गहरी और समान रूप से सांस लेते हुए 15-30 सेकंड के लिए इस मुद्रा में बने रहें।
  • साँस छोड़ें: जैसे ही आप साँस छोड़ें, धीरे से अपनी छाती, पेट और सिर को वापस फर्श पर टिकाएँ।
  • आराम करें: यदि चाहें तो मुद्रा को दोहराने से पहले कुछ सांसों के लिए प्रवण स्थिति में आराम करें।
IMG_6082

भुजंगासन के फायदे:

  • पीठ और रीढ़ को मजबूत बनाता है: भुजंगासन पीठ और रीढ़ की मांसपेशियों को टोन और मजबूत करने में मदद करता है, जिससे समग्र मुद्रा में सुधार होता है।
  • लचीलापन बढ़ाता है: कोबरा आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़, कंधे और छाती का लचीलापन बढ़ सकता है।
  • छाती को खोलता है: यह आसन छाती, फेफड़ों और कंधों को फैलाता है, जो श्वसन स्थितियों और सांस लेने में कठिनाई के लिए फायदेमंद हो सकता है।
  • पेट के अंगों को उत्तेजित करता है: मुद्रा के दौरान पेट पर दबाव पाचन अंगों को उत्तेजित करता है, जिससे पाचन में सुधार होता है।
  • तनाव कम करता है: भुजंगासन तनाव और थकान को कम करने में उपयोगी हो सकता है, क्योंकि यह हृदय केंद्र को खोलता है और गहरी सांस लेने को प्रोत्साहित करता है।
  • कटिस्नायुशूल को शांत करता है: नियमित अभ्यास पीठ के निचले हिस्से को मजबूत करके कटिस्नायुशूल के दर्द और परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है।
  • मासिक धर्म संबंधी विकारों के लिए चिकित्सीय: मासिक धर्म की अनियमितता या परेशानी का अनुभव करने वाली महिलाओं के लिए कोबरा आसन फायदेमंद हो सकता है।

सीमाएँ और मतभेद:

  • पीठ की चोटें: पीठ की चोटों, हर्नियेटेड डिस्क या हाल ही में सर्जरी वाले व्यक्तियों को इस मुद्रा से बचना चाहिए या किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में इसका अभ्यास करना चाहिए।
  • गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को यह आसन सावधानी से करना चाहिए और पेट पर अत्यधिक दबाव डालने से बचना चाहिए।
  • कलाई में दर्द या चोट: कलाई की समस्या या कार्पल टनल सिंड्रोम वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए और असुविधा से बचने के लिए मुद्रा में बदलाव करना चाहिए।
  • पेप्टिक अल्सर या हर्निया: पेप्टिक अल्सर या हर्निया से पीड़ित लोगों को भुजंगासन करने से बचना चाहिए या सावधान रहना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप: यदि आपको उच्च रक्तचाप है, तो गर्दन पर अत्यधिक तनाव से बचने के लिए इस आसन को सावधानी से करें।
  • हाल ही में पेट की सर्जरी: जिन व्यक्तियों की हाल ही में पेट की सर्जरी हुई है, उन्हें पूरी तरह ठीक होने तक इस मुद्रा से बचना चाहिए।

भुजंगासन या किसी अन्य योग मुद्रा का प्रयास करने से पहले हमेशा अपने शरीर की सुनें और यदि आपको कोई चिंता या चिकित्सीय स्थिति है तो किसी योग्य योग प्रशिक्षक या स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श लें।

Leave a comment